दो शब्द उनके लिए, जो नहीं रहते हुए भी हमेशा हमारे साथ हैं !

founder‘अलमस्त’ ‘अथक मेहनती’, ‘कुशल नेत्रित्वकर्ता’, ‘निर्भीक कार्यकर्ता’, ‘निडर समाजसेवी’ ‘एवं सहृदय परोपकारी’ ये सभी विशेषण उनके लिए कम पड़ जाते थे । दोस्तों की जान थे तो शिक्षा जगत की शान भी । सहयोगियों के रहनुमा थे तो स्वजनों के प्राण भी । स्वाभाव ऐसा की जहाँ भी पड़ाव डाला वहीँ सजा ली महफ़िल । जिसपर नजर डाली उसे उद्धार कर दिया ।

आपने कहा था – ‘संगठन से जुड़ो, सफल कार्यकर्ता बनो और जब अपने काम से किसी बड़े के सामानांतर आ जाओ तो एक होने का प्रयास करो । बराबरी में रह कर एकजुट करने की बात भी सुना करते हैं , इसलिए पहले बराबरी पर आ जाओ , फिर एकजुट होने की बात करो ।

अपने आदर्शों के प्रति कठोर, परन्तु दूसरों के प्रति प्रेम एवं क्षमा भाव रखना आपकी विशिष्टता थी । सेवा, प्रेम और अनुशाशन का मणि मंचन संयोग था । आपमें सरल निश्छल एवं स्नेहमयी आपका उज्जवल व्यक्तित्व हमलोगों के लिए ध्रुवतारा की तरह सदैव पथ प्रदर्शक बना रहेगा । अपनी ‘कीर्ति’ एवं ‘जय’ के ‘किरण’ से आपने जो विद्यालय परिवार में ‘मेघा’ की ‘ज्योति’ बिखराई एवं ‘अमन’ का सन्देश पाठ दिया , हमलोगों को सतत प्रेरणा देती रहेगी ।

आपका सपना ‘किरण पब्लिक स्कूल’ आपके आशीर्वाद से हमेशा जनहित के लिए दिन दुनी और रात चौगुनी विकसित होता रहेगा ।

आपका अनंत की ओर प्रस्थान एक बहुत बड़ा शून्य पैदा कर दिया है । आपका जाना जो रिक्तता छोड़ा है उसे भरना मुश्किल है । हम आशीर्वाद दीजिये की आपके रस्ते पर हम चलें , आपके सुझाये मार्गों का अनुसरण करें । आप जिस यात्रा पर निकले हैं , भगवान् अरहित आपकी यात्रा को सुखद करें ।

 

प्राचार्य
किरण पब्लिक स्कूल
मधेपुरा